Sushil
Mittal President Cotton Ginners accuses Mandi Secretary of adamant attitude.
SIRSA NEWS
12 September, 2016
Pictures
and Videos: GS Mann, Amar Singh
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Cotton Ginners of Sirsa go on strike against adamant attitude of market
committee Sirsa Secretary cum EO against her adamant and unhelpful attitude. Speaking at a press conference held on the premises of Garg Cotton Factory, Sushil
Mittal, president Haryana Cotton Ginners Association stated that while in
rest of Haryana State, Haryana Rural Development Fund (HRDF) is collected at 80 paise only then why it is charged
2% in Sirsa, he accused Mandi secretary that she was unable to show the documents/official letter pertaining to this and even refuses to accept
application from Ginners in this context. Sushil Mittal said that he has
already e-mailed their grievances to CM Haryana and concerned officials.
On the other hand Ms. Jaiwanti Kasnia on the other refuted the
allegations and said that she is carrying out everything as per directions from
the Haryana Government and there is no high handedness on her part, in fact
whenever there is any arrival of cotton in the mandi she makes sure that
concerned person from the Market committee is always present at the auction.
Further Details in HINDI below:
-कॉटन जीनर्स ने की हड़ताल , 2 प्रतिशत एचआरडीएफ को लेकर विवाद।
-जिनर्स से 80 पैसे
के हिसाब से ही ली जाये फीस
-जीनर्स एसोसिएशन।
-कॉटन जिनर्स बोले: मार्केट कमेटी सचिव अपना रही है तानाशाही
रवैया।
-पूरे प्रदेश में एचआरडीएफ 80 पैसे भरा जा रहा है मगर सिरसा में 2 प्रतिशत क्यों।
-हरियाणा कॉटन जिनर्स एसोसिएशन ने सचिव के खिलाफ सीईओ को
भेजी शिकायत।
- मार्केट कमेटी सचिव का दावा , विभाग के आदेशानुसार ही वसूली जा रही है एचआरडीएफ फीस।
अभी किसान की कपास की फसल
की आवक शुरू होने वाली है। अभी केवल कुछ ही किसान अपनी कपास की फसल मार्किट
में लेकर पहुँच रहे है लेकिन किसानों की फसल
मार्केट में आते ही जिनर्स ने हड़ताल शुरु कर दी है। यह हड़ताल हरियाणा कॉटन जिनर्स एसोसिएशन के बनैर तले केवल
सिरसा मंडी में की जा रही है। असल में जीनर्स एसोसिएशन व मार्किट कमेटी
सचिव के बीच एचआरडीएफ के लिए वसूली की जा रही दरों को लेकर विवाद है। जीनर्स
एसोसिएशन पुरानी दर 80 पैसे के हिसाब से एचआरडीएफ देना चाहते है जबकि मार्किट
कमेटी की सचिव 2 प्रतिशत के हिसाब से सरकार द्वारा निर्धारित एचआरडीएफ फीस
वसूल करने पर अडिग है। जीनर्स एसोसिएशन का आरोप है कि अभी सरकार द्वारा नई दरों की
अधिसूचना जारी नही हुयी है और पुरे प्रदेश में 80 पैसे
के हिसाब से ही एचआरडीएफ वसूली जा रही है।
सुशील मित्तल , प्रदेश अध्यक्ष, जीनर्स
एसोसिएशन।
इसी विवाद को लेकर आज हरियाणा कॉटन जिनर्स के पदाधिकारियों
ने प्रैस कांफ्रेंस कर सचिव पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं। और कहा कि मार्केट
कमेटी सचिव की तानाशाही रवैया अपना रही है। हरियाणा कॉटन जिनर्स एसोसिएशन के
प्रदेशाध्यक्ष सुशील मितल ने बताया कि हड़ताल मार्केट कमेटी की सचिव जयवंती
कासनिया के रवैये को लेकर की जा रही है। उनका रवैया कॉटन जिनर्स के प्रति ठीक नहीं
हैं। उन्होंने कहा कि मार्केट कमेटी की सचिव जिनर्स से एचआरडीएफ हरियाणा रुरल
डेवेल्पमेंट फंड के रुप में 2 प्रतिशत की मांग कर रही है
जबकि पूरे प्रदेश में एचडीआरएफ 80 पैसे है। पूरे प्रदेश में
सभी जगहों पर एचडीआरएफ के तौर पर जिनर्स से 80 पैसे
के हिसाब से फीस ली जा रही है मगर सिरसा में सचिव ने खुद के नियम बना रखे हैं।
उन्होंने कहा कि 27 नवंबर 2011 से प्रदेश सरकार ने
एचडीआरएफ के तौर पर 80 पैसे लेने शुरु किए थे। उसके बाद से कोई नोटिफिकेशन नहीं
हुआ। कहीं भी एचआरडीएफ के रुप में 2 प्रतिशत फीस नहीं ली जा रही
है। मार्केट फीस उन्होंने अदा कर दी है लेकिन एचडीआरएफ को लेकर पेंच फंसा हुआ है।
उन्होंने कहा कि मार्केट कमेटी की सचिव के खिलाफ उन्होंने ईमेल के माध्यम से सीईओ
पंचकुला को शिकायत भेज दी है। सीईओ ने इस मामले को लेकर आश्वासन भी दिया है। सभी
पदाधिकारियों ने कहा है कि जब तक मार्केट कमेटी की सचिव अपनी गलती स्वीकार नहीं
करती, उनकी हड़ताल लगातार जारी रहेगी।
वहीँ इस विवाद को लेकर मार्किट कमेटी की सचिव जयवंती कासनिया से
बात की गई तो उन्होंने कहा की उनके ऊपर लगे सभी आरोप निराधार है। उन्होंने सरकार
के आदेशों की पालना की है। उन्होंने कहा कि जो भी निर्देश उनके उच्च
अधिकारियों द्वारा दिए जायेंगे उनके अनुसार ही फीस की वसूली की जाएगी। उन्होंने
कहा कि उन्हें जीनर्स की हड़ताल के बारे में भी सुचना नही है। उन्होंने बताया
की अभी तक कपास की आवाक शुरू नही हुयी है। केवल कुछ ही किसान कपास लेकर अभी मंडी
में लेकर आये है। उन्होंने कहा कि ज्यों ही किसान अपनी कपास
की फसल लेकर आएंगे उनकी फसल की खरीद कर ली जाएगी।
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